Friday, September 09, 2016

यादों की दस्तक


ज़रा अपनी यादों से कहो
हौले से दिल पे दस्तक दिया करें.

बीमार है ये दिल अभी
इलाज का खर्च भी बहुत है
पलकों की नींद गिरवी रखी है, बस
तेरे ख्वाबों की दवा से उम्मीद है
जो प्यास लगी इस दिल को
पलकों को निचोड़ आंसू निकला
जब जब इसे भूख लगी
खतों पे तेरा नाम खरोंचा
हर पन्ना जस्बातों का फटा
फिर भी दिल भूखा ही सोया.

ज़रा अपनी यादों से कहो
हौले से दिल पे दस्तक दिया करें.

रात काफ़ी अंधेरी है
सन्नाटा भी ख़ामोशी से सोया है
कभी कभी बरसात की बूंदों का
कानों पे फुसफुसाहट का हमला है
सो रहा है दिल अभी
ज़ाहिर है सपने तेरे ही होंगे
सज़ा तो वैसे इंतज़ार की दी तूने
क्या पता सपनों में साथ ही बैठा हो मेरे
चौंक ने जाये तेरी यादों की दस्तक से
अभी अभी तो सोया है दिल.

ज़रा अपनी यादों से कहो
हौले से दिल पे दस्तक दिया करें.
[image source - Google]


1 comments:

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